रात की बात
रात की बात सखी सुनाना
पिया आये सपने में
बाँका सा छैला
लाली है आँखों पे
कद भी गठीला
जिया धड़काये सखी …
पिया आये सपने में
घुँघटे की ओट से उसको निहारूँ
साँवले सलोने पे
तन मन बिसारूँ
जिया घबराये सखी …
पिया आये सपने में
रात की बात
"कक्षा कम्पयूटर की"
sawan ki bundiya ye dhadiphuhare,
"सपना"
"प्यास"
"रक्षा शिशु की"
"रेल गाड़ी - नई-पुरानी(बाल गीत)"
ओ…छुक-छुक गाड़ी, रेल सवारी
आना-जाना एक शहर से, अब दूजे की बारी
…ओ…छुक-छुक
टिफिन और थाली लेकर आये
रोटी संग अचार भी लाये, टेशन पर तो धक्का-मुक्का
कब आई अपनी बारी
…ओ…छुक-छुक
कोयले सा तो काला इंजन
चम-चम करते डिब्बे हैं संग
दो पटरी पे सरपट भागे
इतनी भरकम-भारी
…ओ…छुक-छुक
नई मेटरो को सलाम करें हम
नया है टेशन, नई है गाड़ी
टिकट कटा कर चैन से बैठो
घूमो दुनिया सारी …ओ छुक-छुक
ओ छुक-छुक गाड़ी रेल सवारी …
"प्रेम-प्यार"
"मेरी सन्धया !"
"गीत - चाँद मेरे"
"मेरे चाँद "
आज म्हारे जियरा जगाई दिये है पीर,
साजन कैसे आऊँ मनवा अधीर ।
साँझ भये तो चमके बिजुरिया,
काँपे है छतिया धड़के है जियरा ।
रिमझिम बुंदिया टप-टप बरस रही,
चहुँ ओर सारी बगिया महक रही,
तुम बिन बालम मनवा अधीर ।
पपिया की पिऊ-पिऊ गुंजन गुँजा रही,
कोयल भी मीठी तान सुना रही,
तानो के बीच मन है पीर ।
आमों के बागों में झूले हैं सखियाँ,
गाती मल्हार रिझाने को रसिया,
ऐसे में बालम जिया है अधीर ।