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Tuesday, July 7, 2009


"रेल गाड़ी - नई-पुरानी(बाल गीत)"

ओ…छुक-छुक गाड़ी, रेल सवारी

आना-जाना एक शहर से, अब दूजे की बारी

…ओ…छुक-छुक

टिफिन और थाली लेकर आये

रोटी संग अचार भी लाये, टेशन पर तो धक्का-मुक्का

कब आई अपनी बारी

…ओ…छुक-छुक

कोयले सा तो काला इंजन

चम-चम करते डिब्बे हैं संग

दो पटरी पे सरपट भागे

इतनी भरकम-भारी

…ओ…छुक-छुक

नई मेटरो को सलाम करें हम

नया है टेशन, नई है गाड़ी

टिकट कटा कर चैन से बैठो

घूमो दुनिया सारी …ओ छुक-छुक

ओ छुक-छुक गाड़ी रेल सवारी …

2 Comments:

Blogger Unknown said...

bahut komal
bahut saumya
bahut achhi kavita !

July 7, 2009 at 11:48 PM

 
Blogger Science Bloggers Association said...

अरे वाह, आपकी रेलगाडी की सैर करके बचपन की याद आ गयी।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

July 8, 2009 at 5:03 AM

 

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