"रेल गाड़ी - नई-पुरानी(बाल गीत)"
ओ…छुक-छुक गाड़ी, रेल सवारी
आना-जाना एक शहर से, अब दूजे की बारी
…ओ…छुक-छुक
टिफिन और थाली लेकर आये
रोटी संग अचार भी लाये, टेशन पर तो धक्का-मुक्का
कब आई अपनी बारी
…ओ…छुक-छुक
कोयले सा तो काला इंजन
चम-चम करते डिब्बे हैं संग
दो पटरी पे सरपट भागे
इतनी भरकम-भारी
…ओ…छुक-छुक
नई मेटरो को सलाम करें हम
नया है टेशन, नई है गाड़ी
टिकट कटा कर चैन से बैठो
घूमो दुनिया सारी …ओ छुक-छुक
ओ छुक-छुक गाड़ी रेल सवारी …



2 Comments:
bahut komal
bahut saumya
bahut achhi kavita !
July 7, 2009 at 11:48 PM
अरे वाह, आपकी रेलगाडी की सैर करके बचपन की याद आ गयी।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }
July 8, 2009 at 5:03 AM
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