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Tuesday, July 14, 2009

"प्यास"

नयनों में प्यास जगी तुम… आ…जाओ
नन्ही सी आस जगी दरस दिखा जाओ…
सूरत तुम्हारी लगे प्यारी प्यारी
छवि भोली भाली छवि अति न्यारी
पलकों में आकर तुम समा जाओ…
अधरों से मेरे मधुर रस बरसे
पलकों पे मेरे यूँ बादर सिमटे
धानी चुनर को तुम आ कर उड़ा जाओ…
सावन का मौसम ये बरखा बहारें
नयनों में कजरा बालों में गजरा
हाथी की मेंहदी को तुम दीपक दिखा जाओ…
फूलों की लाली पे चहके है भँवरा
पपीहे की पीयू पीयू सुन डर रहा जियरा
बदरी बन के साजन छा जाओ…

1 Comments:

Blogger ओम आर्य said...

mansoon aata hi isi liye ki jindgi ki pyas ko kam kar de ........kuchh log bhagyhin hi paida hote jinki pyas agale janm ka injar matra hota hai......khair aapke saajan aapake pas ho yahi dili khwahish hai .....aamin

July 14, 2009 at 4:33 AM

 

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